केंद्रीय श्रम मंत्रालय का कहना की “डेटा नहीं तो मुआवजा नहीं”

केंद्रीय श्रम मंत्रालय का कहना की “डेटा नहीं तो मुआवजा नहीं”
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जब केंद्रीय श्रम मंत्रालय से सोमवार को संसद में पूछा गया कि क्या उन लोगों के परिवारों को जो कोरोनावायरस लॉकडाउन में अपने घर पोहचने के कोशिश में रास्ते में ही अपनी जान गवाई उन्हें मुआवजा दिया जाएगा। तो केंद्रीय श्रम मंत्रालय ने कहा कि ऐसा कोई डेटा नहीं है तो मुआवजा का सवाल ही उठता नहीं होता है पूरे देश में कोरोनावायरस के बचाव के लिए लॉकडाउन लगाया गया था। जिसके कारण कई प्रवासी मजदूर अपने घर जाने के लिए अकेले ही चल पड़े थे। और इस कारण कितने लोग रास्ता भूल गए तो कितने ही लोगों ने अपनी जान गवाई थी।

जब सांसद में सवाल किया गया की क्या सरकार के पास ऐसा कोई डेटा हे जिसमें पता चले कि लॉकडाउन में कितने प्रवासी मजदूर अपने घर पोहूचे और कितने प्रवासी मजदूर बेरोजगार हुऐ। और कितने मजदूर अपने घर जाने के प्रयास में अपनी जान गवाई है। इसके जवाब में केंद्रीय श्रम मंत्री संतोष कुमार गंगवार ने कहा, ” ऐसा कोई डेटा नहीं रखा गया है। जिसे पता चले की कितने लोगो ने अपनी जान गवाई हे। इसलिए मुआवजा की बात ही नहीं है।

सोचने वाली तो यह बात है कि केंद्रीय श्रम मंत्री ने ये कहा कि उनके पास ऐसा कोई डेटा नहीं है कि कितने प्रवासी मजदूरों ने अपनी जान गवाई है। तो मुआवजा का कोई सवाल ही नहीं उठता है। इसपर कांग्रेस के दिग्विजय सिंह ने कहा कि “कभी कभी तो लगता है कि हम सब अंधे है या सरकार को लगता है कि यह हर किसी को दी जा सकती हे” ।

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