जामिया हिंसाः पुलिस की कार्रवाई थी जरूरी

जामिया हिंसाः पुलिस की कार्रवाई थी जरूरी
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जामिया इलाके में भीड़ के हिंसक होने के बाद पुलिस कार्रवाई जरूरी थी। यह दलील शुक्रवार को जामिया हिंसा मामले में दिल्ली पुलिस का पक्ष रखते हुए अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल अमन लेखी ने दी। हाईकोर्ट ने याचिकाकर्ता तथा दिल्ली पुलिस की दलीलें सुनने के बाद अगली सुनवाई के लिए 18 सितंबर की तारीख तय की है।

मुख्य न्यायाधीश डीएन पटेल और प्रतीक जालान की पीठ के समक्ष अमन लेखी ने कहा कि हिंसा की स्थिति के मद्देनजर पुलिस ने प्रदर्शनकारियों की भीड़ को ठीक तरीके से हटाया था। उन्होंने दावा किया कि विश्वविद्यालय परिसर में घुसने वाले दंगाइयों को बाहर निकालने के लिए पुलिस ने प्रवेश किया था।उन्होंने कहा कि 2 हजार से अधिक लोग विश्वविद्यालय के गेट नंबर 1 के पास इकट्ठे हो गए थे, जिससे इस क्षेत्र को बंद कर दिया गया था। उन्होंने कहा विरोध शांतिपूर्ण रूप से शुरू हुआ था, लेकिन धीरे-धीरे यह हिंसक होने लगा था। पुलिस ने भीड़ पर कार्रवाई की क्योंकि उन्होंने दंगा शुरू कर दिया था। इसलिए नहीं कि वे सीएए के खिलाफ विरोध कर रहे थे।एएसजी ने अदालत को बताया कि इस बीच राजनेता आपत्तिजनक और अपमानजनक नारे लगाकर प्रदर्शनकारियों को भड़का रहे थे। इस तरह के भाषणों से अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का संरक्षण नहीं मिल सकता है।

 

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