दुष्कर्म पीड़िता समर्पण यौन संबंधाें की सहमति नहीं

दुष्कर्म पीड़िता समर्पण यौन संबंधाें की सहमति नहीं
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दुष्कर्म पीड़िता द्वारा आरोपी के सामने समर्पण काे याैन संबंध बनाने की सहमति नहीं माना जा सकता है। नाबालिग लड़की के साथ दुष्कर्म के 67 साल के दाेषी की सजा बरकरार रखते हुए केरल हाई काेर्ट ने यह टिप्पणी की।केरल हाईकोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि लैंगिक समानता को लेकर प्रतिबद्ध भारत जैसे देश में यौन संबंध तभी स्वागतयोग्य माना जा सकता है जिसमें पीड़ित के अधिकारों का उल्लंघन नहीं हो और तभी उसे सहमति के रूप में स्वीकार किया जा सकता है।

न्यायमूर्ति पीबी सुरेश कुमार ने यह फैसला 67 वर्षीय व्यक्ति द्वारा निचली अदालत के फैसले के खिलाफ दायर याचिका पर सुनाया। व्यक्ति को पथनमथिट्टा की सत्र अदालत ने 2009 में अनुसूचित जाति की नाबालिग लड़की से दुष्कर्म करने और गर्भधारण कराने का दोषी करार दिया था। अपील में आरोपी ने दावा किया कि पीड़ित लड़की द्वारा उपलब्ध कराए गए सबूत यह दिखाते हैं कि यौन संबंध आपसी सहमति से बना। आरोपी के वकील ने भी कहा कि पीड़िता ने स्वीकार किया है कि जब उसे यौन संबंध बनाने की इच्छा होती थी तब वह आरोपी के घर जाती थी।

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