दोस्तों-परिजनों से लिए कर्ज पर कर तो नहीं लगेगा?

दोस्तों-परिजनों से लिए कर्ज पर कर तो नहीं लगेगा?
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ऑटोमैटिक चाय-कॉफी मेकर की एक अग्रणी कंपनी के वितरक संजय के कारोबार पर भी कोरोना की मार पड़ी है और यह कोरोना से पहले का करीब एक तिहाई रह गया है। करीब पच्चीस साल पहले संजय सिंह ने चार और कॉफी मेकर के वितरक के रूप में शुरू किया था और दक्षिण दिल्ली तथा नोएडा के अनेक छोट-बड़े दफ्तरों में उन्होंने अपनी मशीनें लगाईं। उनका यह कारोबार बीपीओ के फलने-फूलने के साथ ही तेजी से चल निकला। उनके इस उपक्रम में शुरुआत में उनके पिता ने अनमने ढंग से पचास हजार रुपये की पूंजी लगाई थी, क्योंकि वह तो चाहते थे कि उनका बेटा सिविल सर्विस में जाए।

मगर कुछ वर्षों में जब उनका कारोबार आगे बढ़ा, तो संजय ने नोएडा में अपना एक दफ्तर भी खोल लिया। उनकी कड़ी मेहनत रंग लाई और उन्होंने तीस लोगों को अपने यहां रोजगार भी दिया। महामारी के फैलते ही उन्हें अपने आधे कर्मचारियों को हटाना पड़ा। नकदी का संकट बढ़ने लगा, तो उन्हें परिवार तथा दोस्तों से कर्ज लेना पड़ा, ताकि वह इस कठिन दौर का सामना कर सकें। वह दुविधा में हैं कि क्या ऐसा करना ठीक है।

 

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