पुलिस नहीं साबित कर पाई कैसे हुई पहचान, आरोपियों को मिली जमानत

पुलिस नहीं साबित कर पाई कैसे हुई पहचान, आरोपियों को मिली जमानत
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अदालत ने उत्तर पूर्वी दिल्ली दंगा मामले में गिरफ्तार तीन आरोपियों को बुधवार को तब जमानत प्रदान कर दी जब पुलिस यह साबित नहीं कर पाई कि उन आरोपियों की पहचान कैसे हुई थी। पुलिस ने इन पर दंगे के दौरान खजूरी खास इलाके में एक युवक की हत्या करने और दंगे को भड़काने का आरोप लगाया था।

कड़कड़डूमा अदालत के अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश विनोद यादव ने जमानत याचिका पर सुनवाई के बाद इसरार अहमद, मोहम्मद तैय्यब और मोहम्मद रिजवान को 20-20 हजार रुपये के निजी मुचलके और इतनी ही राशि के जमानती मुचलके पर जमानत प्रदान की।कोर्ट ने कहा कि आरोपियों की पहचान किस आधार पर की गई, इस संबंध में कोई सीसीटीवी फुटेज या अन्य प्रमाण पुलिस ने पेश नहीं किया है। इसलिए आरोपियों को और अधिक समय तक न्यायिक हिरासत में नहीं रखा जा सकता। कोर्ट ने आरोपियों को केस के साक्ष्यों से छेड़छाड़ न करने और अपने मोबाइल फोन खुले रखने तथा आरोग्य सेतु एप डाउनलोड करने का निर्देश दिया।

पेश जमानत याचिका पर जिरह करते हुए वकील एमएम हाशमी ने दलील दी कि उनके मुवक्किलों को झूठे मामले में फंसाया गया है और पुलिस को उनके खिलाफ कोई साक्ष्य भी नहीं मिले हैं। लिहाजा उन्हें जमानत दी जाए। वहीं अभियोजन पक्ष ने जमानत याचिका का विरोध करते हुए कहा कि तीनों आरोपियों पर गंभीर आरोप हैं, इसलिए इन्हें जमानत नहीं दी जानी चाहिए।

 

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