मारुति सुजुकी को उम्मीद, त्यौहारी सीजन में बढ़ेगी वाहनों की बिक्री

मारुति सुजुकी को उम्मीद, त्यौहारी सीजन में बढ़ेगी वाहनों की बिक्री
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नई दिल्ली
देश के आटोमोबाइल क्षेत्र में दो वर्ष की सर्वाधिक मंदी के कारणों को लेकर छिड़ी बहस के बीच अग्रणी यात्री कार कंपनी मारुति सुजुकी इंडिया लिमिटेड चालू त्यौहारी सीजन में वाहनों की बिक्री बढ़ने को लेकर पूरी तरह आशान्वित है किंतु संभावित बढ़ी मांग को आगे भी सतत रुप से कैसे बरकरार रखा जाए इसे लेकर फ्रिकमंद है। अगस्त 19 में देश में वाहन बिक्री में आई गिरावट के लिए अलग-अलग कारण गिनाए जा रहे हैं और इसको लेकर बहस छिड़ी हुई है। मारुति सुजुकी के कार्यकारी निदेशक (बिक्री एवं विपणन) शशांक श्रीवास्तव ने कहा कि वाहनों की मांग में कमी कोई एक माह में नहीं आई है। उन्होंने कहा कि 2018-19 की पहली तिमाही के बाद जुलाई 18 से वाहनों की बिक्री में गिरावट का दौर शुरु हुआ और यह पिछले 14 माह में गहराता चला गया। श्रीवास्तव ने कहा कि पिछले साल केरल में ओणम के मौके पर आई भयंकर बाढ़ से दक्षिण के क्षेत्रों में मांग पर असर पड़ना शुरु हुआ था और वह बराबर बढ़ता चला गया। उन्होंने कहा कि इस ओणम से फिर त्यौहारी सीजन की मांग शुरु हुई है। वाहन खरीदने के इच्छुक ग्राहकों की तरफ से पूछ परख बढ़ने लगी है और उम्मीद है कि नवरात्र से मांग निकलनी शुरु हो जाएगी। कार्यकारी निदेशक ने कहा कि दो माह के त्यौहारी सीजन के दौरान मांग अच्छी रहने की उम्मीद है किंतु इस संभावित मांग को आगे भी कैसे बरकरार रखा जाए इस पर नजर रखने की जरुरत है। वाहन बिक्री में आई गिरावट का उल्लेख करते हुए श्रीवास्तव ने कहा नियामक बदलावों से कारों की कीमत में खासी बढ़ोतरी हुई। खरीदार को वाहन खरीदने के लिए ऋण मिलने में दिक्कत, बीएस4 से बीएस 6 को लेकर ग्राहकों में संशय की स्थिति मांग में कमी के मुख्य कारण रहे। उन्होंने बताया कि नियामक बदलाव से कारों में सुरक्षा के लिहाज से विभिन्न सहूलियतों को उपलब्ध कराना, राज्यों के पथकर में 7 प्रतिशत बढ़ोतरी और उच्चतम न्यायालय के नए वाहन की खरीद पर तीन साल का बीमा अनिवार्य करना आदि की वजह से कीमतों में बढ़ोतरी हुई। श्रीवास्तव ने कहा कि इन कारणों से मारुति की छोटी कार अल्टों के दाम ही 15 से 21 प्रतिशत के बीच बढ़ गए। रिजर्व बैंक ने रेपो दर को 6.50 से घटाकर 5.30 प्रतिशत कर दिया किंतु बैंकों ने ब्याज दर में मुश्किल से 10 से 15 आधार अंक की कटौती की। नए खरीदारों को वाहन खरीदने के लिए ऋण लेने में औपचारिकताओं के बढ़ने के साथ ही बैंकों ने डीलरों को भी कर्ज मुहैया कराने में कड़ा रुख दिखाया।

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