अगली चुनौती के लिए भी तैयार हैं कोरोना योद्धा

अगली चुनौती के लिए भी तैयार हैं कोरोना योद्धा
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पिछले एक साल में स्वास्थ्य कर्मियों ने पहली पंक्ति में खड़े होकर कोरोना के खिलाफ जंग लड़ी है। इस दौरान कई डॉक्टर और नर्स संक्रमित भी हुए। अपनी और परिवार की चिंता किए बगैर वह मरीजों की सेवा करते रहे। महामारी ने कई बार विकराल रूप भी दिखाया, लेकिन कोरोना योद्धाओं के हौसलों के सामने वह भी पस्त हो गई। अब संक्रमण एक बार फिर बढ़ रहा है तो स्वास्थ्य कर्मी भी पूरी तरह तैयार हैं। वह लोगों से बचाव के नियमों का पालन करने की भी अपील कर रहे हैं। ऐसे ही चार कोरोना योद्धाओं ने अपने अनुभव साझा किए।

चुनौतीपूर्ण था शुरुआती समय
शुरुआत का समय काफी चुनौतीपूर्ण रहा। कभी नहीं सोचा था कि ऐसा दौर भी आएगा। उस समय इस वायरस के बारे में ज्यादा जानकारी नहीं थी। सबसे पहली जिम्मेदारी मरीजों की जान बचाने की थी। स्वास्थ्य कर्मियों ने खुद की जान की परवाह किए बगैर रोगियों का इलाज किया। कोरोना योद्धाओं के हौसले के आगे महामारी कमजोर भी हुई, लेकिन अब कुछ दिनों से मामले बढ़ रहे हैं। लोगों से अपील है संक्रमण से बचाव के नियमों का पालन करते रहें।

– डॉ. आरएस रौतेला, चिकित्सा निदेशक, जीटीबी अस्पताल

दो लोगों को प्लाज्मा दान कर चुका हूं…

लॉकडाउन के दौरान लोगों तक सभी जरूरी सेवाएं पहुंचा रहा था। उस दौरान संक्रमित भी हुआ। करीब दो सप्ताह तक अस्पताल में भर्ती रहा। वह समय अभी याद करता हूं तो भावुक हो जाता हूं। उस दौरान काफी समय तक परिवार से अलग रहा। मन में कई नकारात्मक ख्याल भी आते थे, लेकिन संक्रमण को मात दी और ठीक होने के एक सप्ताह बाद ही ड्यूटी ज्वाइन कर ली थी। स्वस्थ होने के बाद काफी अच्छा महसूस किया। अब तक दो लोगों को प्लाज्मा दान कर चुका हूं। अब जिन लोगों से भी मिलता हूं, उन्हें इस बीमारी के प्रति जागरूक करता हूं।

– विपिन यादव, हेड कांस्टेबल दिल्ली पुलिस

आग्रह करके कोविड वार्ड में लगवाई ड्यूटी
सात साल से एम्स में कार्यरत हूं। चिकित्सा निदेशक से आग्रह करके अपनी ड्यूटी कोविड वार्ड में लगवाई। उस दौरान परिवार के लोगों ने भी साथ दिया और कोरोना मरीजों का इलाज करने के लिए प्रेरित किया। लगातार कई महीनों तक बिना छुट्टी लिए रोगियों की सेवा की। जब रोगी स्वस्थ होकर घर जाते थे तो बहुत खुश होते थे। उन्हें देखकर ही मुझे भी काफी खुशी होती थी। अब कुछ दिन से मामले फिर बढ़ रहे हैं। इस महामारी से लड़ने के लिए पूरी तरह तैयार हूं।
– उर्मिला, नर्सिंग अधिकारी एम्स

मैंने हिम्मत नहीं हारी और कोरोना को हराया
अस्पताल के कोविड-19 क्लीनिक में कोरोना सैंपल कॉर्डिनेटर इंचार्ज के रूप में पांच माह सेवाएं दी। कोरोना संदिग्धों के सैंपल खुद ही लेकर अलग-अलग लैब में जाता था। उस दौरान सैंपल लेकर जिस भी घर से निकलता था, आसपास के लोग अजीब सी निगाह से देखते थे, लेकिन हतोत्साहित नहीं हुआ। लगातार अपने कार्य में लगा रहा। इस दौरान संक्रमित भी हुआ और स्थिति इतनी गंभीर हुई कि एक माह तक आईसीयू में भर्ती रहना पड़ा, लेकिन हिम्मत नहीं हारी और कोरोना के खिलाफ जंग जीत गया।
– संदीप अमेटा, नर्सिंग अधिकारी, जीटीबी अस्पताल

 

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