कुरुक्षेत्र: साफ हो सकता है कॉरपोरेट खेती का रास्ता

कुरुक्षेत्र:  साफ हो सकता है कॉरपोरेट खेती का रास्ता
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मोदी सरकार ने कृषि क्षेत्र में सुधार के लिए जो तीन नए कानून बनाए हैं उनसे भारतीय खेती की पूरी तस्वीर बदल जाएगी। कृषि विशेषज्ञों का यहां तक कहना है कि इन तीनों कानूनों के जरिए केंद्र सरकार ने संविदा खेती के साथ-साथ कॉरपोरेट खेती की तरफ भी कदम बढ़ा दिए हैं। नाम न छापने की शर्त पर एक जाने-माने कृषि विशेषज्ञ जिनका केंद्र सरकार में भी खासा रसूख है, ने  बताया कि कृषि सुधारों की दिशा में सरकार का अगला कदम और भी अहम होगा। वह यह कि भूमि हदबंदी कानून (लैंड सीलिंग एक्ट) में बदलाव का भी हो सकता है, जिससे कॉरपोरेट खेती का रास्ता साफ हो सके। अगर एसा हुआ तो भारत में ग्रामीण और कृषि अर्थव्यवस्था का पूरा ढांचा ही बदल जाएगा।

केंद्र सरकार द्वारा कृषि क्षेत्र में सुधार के लिए जो तीन नए कानून बनाए हैं, वह इसी साल अप्रैल से ही अध्यादेश के रूप में लागू हो चुके थे। अब उन्हें सिर्फ संसद की मंजूरी मिली है जो संवैधानिक बाध्यता है। लेकिन इन तीनों कानूनों को लेकर विरोधियों और समर्थकों के बीच देश बंट गया है। पूरा विपक्ष और अनेक किसान संगठन इन कानूनों को देश के किसानों के लिए मौत का परवाना कहते हुए सरकार पर हमलावर हैं। किसान संगठनों ने देशव्यापी आंदोलन की घोषणा कर दी है। पंजाब, हरियाणा, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, तमिलनाडु, महाराष्ट्र, कर्नाटक, गुजरात आदि राज्यों से किसान असंतोष की खबरें आ रही हैं। यहां तक कि लंबे समय से भाजपा के भरोसेमंद सहयोगी शिरोमणि अकाली दल ने केंद्र सरकार से अपनी मंत्री हरसिमरत कौर का इस्तीफा भी करवा दिया। हरियाणा में भाजपा के सहयोगी दल जजपा और राज्य के उपमुख्यमंत्री दुष्यंत चौटाला पर भी दबाव बढ़ गया है।

 

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