डोकलाम बॉर्डर पर और मजबूत होगी भारतीय सेना, अब नही चलेगी चीन की दादागिरी

डोकलाम बॉर्डर पर और मजबूत होगी भारतीय सेना, अब नही चलेगी चीन की दादागिरी

भारत, चीन सीमा  के नज़दीक अपनी रोड़ के जाल को फैलाने के काम को तेज़ी से आगे बढ़ रहा है. इसी के मद्देनज़र भारत ने सिक्किम में एक ऐसी रोड़ के काम को पूरा किया है जो की डोकलाम प्लाटू के नज़दीक हमारी सीमा तक जाता है. ये इकलौती सड़क है जो कि डोकलाम तक जाती है. हालाकि इस सड़क का निर्माण डोकलाम के विवाद के बाद शुरू नही हुआ. इस प्रोजेक्ट पर 2015 से काम चल रहा था. डोकाला के पास तक जाने वाली इस सड़क को पूरा कर लिया गया है. भारत चीन सीमा पर विवाद आए दिन होते हैं और ऐसे में चीन की सीमा तक जाने वाली भारत की सड़कों के ख़स्ता हाल के चलते हर मौसम में इस्तेमाल में लाए जाने वाली स्ट्रेटिजिक रोड़ के प्रोजेक्ट को शुरू किया गया था.

डोकलाम के विवाद के बाद रोड़ के बनाने के काम को और तेज किया गया ताकी सेना की मूवमेंट और साजों सामान पहुँचाने में ज़्यादा समय न लगे. बॉर्डर रोड़ ऑर्गेनाइज़ेशन ने इस काम को पूरा किया. इस्ट सिक्किम के कुपुप से ट्राई जंशन भीम बेस डोकाला तक रोड़ के काम को पूरा कर लिया है. इस रोड़ के बन जाने के बाद से घोड़े, खच्चर और पैदल जाने में लगने वाले 6 घंटे का समय सिर्फ 40 मिनट में पूरा हो जाएगा.

भीम बेस डोकाला को जोड़ने वाले एक और एक्स का काम भी तेज़ी से चल रहा है जो कि अगले साल तक पूरा हो जाएगा. ये एक्सिस फ़्लैग हिल – मधुबाला से होते हुए डोकला तक पहुँचेगा और उसे भीम बेस से जोड़ेगा. अगर इस इलाके में काम की रफ़्तार पर गौर करें तो साल के 365 दिन में से महज़ 100 दिन ही काम हो पाता है. सबसे बडी चुनौती यह है कि ये इलाक़ा और मौसम हाई ऑल्टेट्यूड एरिया में आता है और उंचाई 13000 फ़िट से 14000 फ़िट तक जाती है. जून से सिंतबर तक बारिश के चलते काम में दिक्कत आती है. पहाड़ कच्चे है तो भूस्खलन के चलते रोड़ ख़राब हो जाती है ऐसे में सिर्फ 15 अक्टूबर से 15 दिसंबर तक ही काम होता है. बर्फबारी के बाद 15 अप्रैल से 15 मई तक काम होता है. इस इलाके में सड़क बनाने में इसलिए भी देरी हुई क्योंकि ये पूरा इलाक़ा वाइल्डलाइफ़ सैंचुरी में आता है और उस जगह रोड बनाने की परमिशन में थोड़ा समय लगा.

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