सी.ए.बी. का 3.60 करोड़ गांठ उत्पादन का अनुमान

सी.ए.बी. का 3.60 करोड़ गांठ उत्पादन का अनुमान

कपड़ा मंत्रालय के कॉटन एडवाइजरी बोर्ड (सी.ए.बी.) ने अपने ताजा अनुमान में देश में चालू कपास सीजन वर्ष 2019-20 के दौरान व्हाइट गोल्ड की 3.60 करोड़ गांठ पैदावार होने की उम्मीद जताई है, जबकि कपास सीजन वर्ष 2018-19 में यह पैदावार 3.30 करोड़ गांठ रही थी। सी.ए.बी. के अनुसार चालू कपास सीजन के दौरान पंजाब में 13 लाख गांठ, हरियाणा 22 लाख, राजस्थान 25 लाख, गुजरात 95 लाख, महाराष्ट्र 82 लाख, मध्य प्रदेश 20 लाख, तेलंगाना 53 लाख, आंध्र प्रदेश 20 लाख, कर्नाटक 18 लाख, तमिलनाडु 6 लाख, ओडिशा 4 लाख व अन्य राज्यों में 2 लाख गांठ पैदावार होने के कयास लगाए गए हैं। कॉटन एडवाइजरी बोर्ड के अनुसार इस सीजन में गत साल के मुकाबले 1 प्रतिशत कम बुआई से 125.84 लाख हैक्टेयर में व्हाइट गोल्ड की बुआई हुई लेकिन इस बार कपास उपज 486.33 किलो प्रति हैक्टेयर है जबकि गत साल यह पैदावार 443.20 किलो प्रति हैक्टेयर थी। इस साल कपास की पैदावार में 10 प्रतिशत की वृद्धि की गई है। सी.ए.बी. ने मुबम्ई में हुई अपनी ताजा बैठक में अनुमान लगाया गया है कि इस साल रूई का निर्यात बढ़ कर 50 लाख गांठ और आयात घट कर 25 लाख गांठ ही होने की उम्मीद है। टैक्सटाइल्ज कमिश्नर की अध्यक्षता में हुई बैठक में कहा गया कि फसल सीजन साल 2018-19 में भारत से विभिन्न देशों को 44 लाख गांठ, निर्यात व 31 लाख गांठ आयात हुई थी, जबकि मिलों की खपत 274.50 लाख गांठ, एस.एस.आई. यूनिट खपत 25 लाख व नॉन-टैक्सटाइल्ज यूनिट खपत 16 लाख गांठ रही। इस चालू कपास सीजन साल 2019-20 में देश की स्पिनिंग मिलों की खपत 288 लाख गांठ, एस.एस. आई. यूनिट 25 लाख व नॉन- टैक्सटाइल्ज यूनिट खपत 18 लाख गांठ रहने की उम्मीद है। विश्व रूई बाजार में मंदी का दौर जारी रहने से इसका बड़ा असर भारत पर भी पड़ा है। सूत्रों के अनुसार प्रत्येक वर्ष भारत से नवम्बर तक निर्यातकार विभिन्न देशों के साथ 20-30 लाख गांठ रूई निर्यात के सौदे कर देते थे लेकिन इस बार माना जाता है कि अभी तक 5 से 550 लाख गांठों से ही सौदे हुए हैं। दूसरी तरफ कॉटन एडवाइजरी बोर्ड का कहना है कि इस वर्ष गत वर्ष की तुलना में 6 लाख गांठ ज्यादा निर्यात होगा। इससे कारोबारी हैरत में हैं। कपड़ा मंत्रालय स्पिनिंग मिलों की कई साल से सबसिडी रोके बैठा है। जिला पटियाला स्पिनिंग मिल्ज एसोसिएशन के एक वरिष्ठ नेता व गजराज टैक्सटाइल्ज मिल्ज समाना के एम.डी. भानू प्रताप सिंगला के अनुसार सरकार यदि मिलों को उनकी बनती सबसिडी जारी कर दे तो मिलों को बड़ी राहत मिलेगी। दूसरी तरफ सरकार जी.एस.टी. जल्दी रिफंड नहीं करने से मिलों को बड़ी आर्थिक तंगी बनी हुई है। पी.एम.ओ. स्पिनिंग मिलों की ताजा आर्थिक स्थिति को देखते हुए मिलों को विशेष आर्थिक पैकेज जारी करे।चालू सीजन के दौरान गत 24 नवम्बर तक देश में 32 लाख गांठ कपास की आवक हो चुकी है जिसमें भारतीय कपास निगम ने केवल 2 लाख गांठ कपास की खरीद की है। पिछले साल इस अवधि के दौरान उत्पादक मंडियों में 36 लाख गांठ की कपास आवक हो चुकी थी। पिछले फसल सीजन 2018-19 में निगम ने एम.एस.पी. पर 10.70 लाख गांठ कपास की खरीदारी की थी, जिसमें से 1.70 लाख गांठ बेची गई है। बाकी गांठ अभी तक निगम के कब्जे में ही पड़ी है। माना जाता है कि निगम को 9 लाख गांठ स्टाक में रहने से कई करोड़ रुपए की हानि हो चुकी है। विश्व रूई बाजार में मंदी व भारत की मिलों की यार्न ने कमर तोडऩे से रूई भाव में मंदी का दौर ही बना हुआ है। कई माह पहले आई मंदी के बाजार ने अधिकतर स्पिनिंग मिलों की हालात खराब कर दी है जिससे उनकी ताकत काफी कमजोर पड़ चुकी है। दूसरी तरफ पिछले साल कपास पैदावार कम होने से अधिकतर रूई कारोबारियों ने रूई गांठों का मोटा-मोटा स्टाक कर लिया लेकिन सीजन के अंत में तेजी की जगह बाजार औंधे मुंह आ गिरा जिससे स्टाकिस्टों को बड़ी आर्थिक चोट लगी जिससे स्टाकिस्ट अभी तक उभर नहीं पाए हैं।

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